शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। जनपद में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत कथित बड़े घोटाले का मामला सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। मंडलायुक्त डॉ. रूपेश कुमार ने इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए लगभग 10,000 आवासों के आवंटन की जांच के लिए स्वतंत्र समिति गठित करने के आदेश जारी किए हैं। इस कार्रवाई के बाद संबंधित विभाग में हड़कंप मच गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने मंडलायुक्त से व्यक्तिगत मुलाकात कर पूरे मामले की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने आरोप लगाया कि डूडा विभाग की मिलीभगत से प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गई हैं और अपात्र व्यक्तियों को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आवास आवंटित किए गए हैं।
विकास त्यागी ने यह भी दावा किया कि योजना के तहत स्वीकृत लगभग 12,000 आवासों में से केवल 2,000 आवास ही पात्र लाभार्थियों को दिए गए हैं, जबकि शेष करीब 10,000 आवास फर्जी आधार कार्ड और दस्तावेजों के जरिए अपात्र लोगों को आवंटित कर दिए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे प्रकरण में विभाग के एमआईएस कर्मचारी मो० अहतमाम की प्रमुख भूमिका है, जिसने कथित रूप से फर्जीवाड़ा कर करोड़ों रुपये का गबन किया है।

शिकायतकर्ता ने मंडलायुक्त के समक्ष यह भी तर्क रखा कि जिस विभाग पर आरोप लग रहे हैं, वही विभाग इस मामले की जांच कर रहा है, जिससे निष्पक्ष जांच संभव नहीं है। इस पर मंडलायुक्त ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करने का निर्णय लिया।
मंडलायुक्त डॉ. रूपेश कुमार ने जिलाधिकारी सहारनपुर को निर्देशित किया है कि डूडा विभाग से अलग एक स्वतंत्र और उच्च स्तरीय त्रिसदस्यीय जांच समिति गठित की जाए, जो पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और गहन जांच करे। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि जांच प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी की जाए।
विकास त्यागी ने प्रशासन से यह भी मांग की है कि जांच पूरी होने तक मुख्य आरोपी कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त किया जाए, ताकि वह जांच को प्रभावित न कर सके। साथ ही उन्होंने दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सरकारी धन की रिकवरी सुनिश्चित करने की भी मांग उठाई है।
इस मामले के सामने आने के बाद प्रशासनिक तंत्र में हलचल तेज हो गई है। अधिकारियों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
जानकारों का मानना है कि यदि इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच होती है, तो यह प्रदेश में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है। वहीं आम जनता भी इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की उम्मीद कर रही है।
फिलहाल, मंडलायुक्त के आदेश के बाद अब सभी की नजरें गठित होने वाली जांच समिति और उसकी रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस कथित महाघोटाले की सच्चाई को उजागर करेगी।








