शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। नगर निगम द्वारा जीआईएस सर्वे के आधार पर जारी किए गए संपत्ति कर बिलों को लेकर शहर में लगातार आपत्तियां सामने आ रही हैं। अब तक 24 प्रतिशत से अधिक संपत्ति स्वामियों ने आपत्ति दर्ज कराते हुए स्वकर प्रपत्र भर दिए हैं, जबकि प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग अपनी शिकायतें और आपत्तियां लेकर नगर निगम पहुंच रहे हैं।
नगर निगम के सर्वे के अनुसार महानगर में करीब 2 लाख 13 हजार संपत्तियां कर के दायरे में हैं। इनमें लगभग 37 हजार व्यावसायिक, करीब 1 लाख 43 हजार आवासीय तथा शेष अन्य प्रकार की संपत्तियां शामिल हैं। बीते वर्ष नगर निगम ने जीआईएस सर्वे के आधार पर 37 हजार व्यावसायिक संपत्तियों को नोटिस जारी कर संशोधित बिल भेजे थे। इसके बाद व्यापारियों और उद्यमियों ने कर में कई गुना बढ़ोतरी का आरोप लगाते हुए विरोध दर्ज कराया था।

स्वकर प्रणाली अपनाने का लिया गया निर्णय
विरोध के बाद नगर निगम ने संपत्ति स्वामियों से आपत्तियां मांगी थीं। करीब पांच हजार आपत्तियां आने के बाद इनके निस्तारण में अधिकारियों को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ा। इसके बाद निगम ने स्वकर प्रणाली अपनाने का निर्णय लिया और व्यावसायिक भवन स्वामियों से स्वकर प्रपत्र भरकर जमा कराने को कहा। वर्तमान में 37 हजार व्यापारियों और उद्यमियों में से लगभग 8 हजार 500 लोग आपत्ति दर्ज कराते हुए स्वकर प्रपत्र भर चुके हैं, जो कुल का करीब 24 प्रतिशत है।
आवासीय संपत्तियों पर भी मिल रहीं आपत्तियां
नगर निगम ने आवासीय भवनों के लिए भी जीआईएस सर्वे के आधार पर लगभग 72 हजार नोटिस और बिल जारी किए हैं। इन नोटिसों को लेकर भी प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग आपत्तियां दर्ज कराने पहुंच रहे हैं। निगम प्रशासन इनसे स्वकर प्रपत्र भरवाकर जमा करा रहा है और अब तक हजारों प्रपत्र भरे जा चुके हैं।
सॉफ्टवेयर की गड़बड़ी से निकले गलत बिल
नगर निगम ने जिन व्यावसायिक भवनों के बिल संशोधित कर जीआईएस सॉफ्टवेयर पर अपलोड किए थे, उन्हें सॉफ्टवेयर की खामी के कारण स्वीकार नहीं किया गया। इसके चलते कई स्थानों पर फिर से बढ़े हुए बिल निकल गए। ऐसे बिलों की सटीक संख्या के बारे में अधिकारी स्पष्ट जानकारी देने से बच रहे हैं।

नगर निगम के कर अधीक्षक सुधीर शर्मा ने बताया कि सॉफ्टवेयर का परीक्षण करते समय कुछ तकनीकी गड़बड़ी के कारण गलत बिल निकल गए थे, जिन्हें अब ठीक करा दिया गया है। उन्होंने कहा कि जिन 37 हजार व्यावसायिक भवनों को नोटिस जारी किए गए थे, उनमें से अब तक लगभग 8 हजार 500 लोग स्वकर प्रपत्र भर चुके हैं।








